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डॉ.अभिज्ञात का ब्लाग

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Thursday, 12 August 2010

सरस रचनात्मक ताजगी की डगर

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Sanmarg-22 August 2010 दिमाग़ में घोंसले/उपन्यास/लेखक-विजय शर्मा/ प्रकाशक-अंतिका प्रकाशन, सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन, एक्सटेंशन-2, गाजिय...
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डॉ.अभिज्ञात
KOLKATA, West Bengal, India
वास्तविक नामः डॉ.हृदय नारायण सिंह। जन्म-1962, ग्राम-कम्हरियां, ज़िला-आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश। शिक्षा-हिन्दी में कलकत्ता विश्वविद्यालय से पीएच-डी। प्रकाशित कविता संग्रह-एक अदहन हमारे अन्दर, भग्न नीड़ के आर-पार, सरापता हूं, आवारा हवाओं के ख़िलाफ़ चुपचाप, वह हथेली, दी हुई नींद, खुशी ठहरती है कितनी देर, बीसवीं सदी की आख़िरी दहाई, कुछ दुःख कुछ चुप्पियां, ज़रा सा नास्टेल्जिया। उपन्यास-अनचाहे दरवाज़े पर, कला बाज़ार, टिप टिप बरसा पानी। कहानी संग्रह-तीसरी बीवी, मनुष्य और मत्स्यकन्या, मुझे विपुला नहीं बनना। रचनाएं कई भारतीय भाषाओं व अंग्रेज़ी में अनूदित। भोजपुरी में भी लेखन। आकांक्षा संस्कृति सम्मान, कादम्बिनी लघुकथा पुरस्कार-2007, कौमी एकता अवार्ड, अम्बेडकर उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान, राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक साहित्य सम्मान, कबीर सम्मान, अग्रसर पत्रकारिता सम्मान, पंथी सम्मान। पेंटिंग में भी गति। हिन्दी फ़ीचर फिल्म चिपकू, बांग्ला फ़ीचर फिल्मों 'एक्सपोर्टः मिथ्या किन्तु सत्ती', 'महामंत्र', 'एका एवं एका', 'जशोदा', शार्ट फ़िल्म 'ईश्वर, नोमोफोबियाः एक यंत्र, लव जिहाद, धारावाहिक 'प्रतिमा' में अभिनय। पेशे से पत्रकार। जनसत्ता, अमर उजाला, वेबदुनिया डाट काम, दैनिक जागरण के बाद सम्प्रति सन्मार्ग दैनिक में डिप्टी न्यूज़ एडिटर। कोलकाता ई मेल-abhigyat@gmail.com
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